Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

dhanteras vrat katha dhanteras kaise mnate hai

धनतेरस व्रत कथा 

श्री गणेशाय नमः
धनतेरस कब और कैसे मनाय जाता है

धनतेरस धनत्रयोदशी की कथा कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी धनत्रयोदशी अर्थात धनतेरस के रूप में मनाई जाती है यह दीपावली के आने की शुभ सूचना है । इस दिन धनवंतरी के पूजन का विधान है कहते हैं कि इस दिन धनवंतरि वैद्य समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए धनतेरस को धन्वंतरी जयंती भी कहा जाता है ।

इस दिन घर के टूटे-फूटे पुराने बर्तनों के बदले नए बर्तन खरीदने का विधान है । चांदी के बर्तन खरीदना भी इसमें अत्यधिक शुभ माना जाता है । इस दिन वैदिक देवता यमराज को भी सूचित किया जाता है । यम के लिए आटे का दीपक बनाकर घर के द्वार पर रखा जाता है । रात्रि को स्त्रियां दीपक में तेल डालकर चार बत्तियां बना कर जलती  हैं।

जल, रोली, चावल और फूल नैवेद्य आदि सहित दीपक जलाकर यम का पूजन करती हैं कहते हैं । कहते है कि इस दिन हल जुती मिट्टी को दूध में भिगोकर उसमें सेमर की शाखा डालकर तीन बार अपने शरीर पर फेरना तथा कुमकुम लगाना चाहिए । साथ ही तुला राशि के सूर्य में चतुर्दशी अमावस्या की संध्या को जलती लकड़ी की मशाल से पितरों का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए ।

श्री धनतेरस व्रत कथा


एक बार भगवान विष्णु लक्ष्मी जी सहित पृथ्वी पर घूमने आए । कुछ देर बाद भगवान लक्ष्मी जी से बोले मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं । तुम यही ठहरो किंतु लक्ष्मी जी विष्णु जी के पीछे चल कुछ दूर चलने पर एक ईख का खेत मिला।

लक्ष्मी जी एक गन्ना तोड़ कर चूसने लगी । भगवान लौटे तो उन्होंने लक्ष्मी जी को गन्ना चूसते पाया इस पर क्रोधित होकर उन्होंने श्राप दिया कि तुम जिस किसान का यह खेत है, उसके यहां पर 12 वर्ष तक उसकी सेवा करो । विष्णु भगवान क्षिर सागर लौट गए तथा लक्ष्मी जी ने किसान के यहां रहकर उसे धन-धान्य से पूर्ण कर दिया ।

12 वर्ष पश्चात लक्ष्मी जी भगवान विष्णु के पास जाने के लिए तैयार हो गई, किंतु किसान ने उन्हें जाने नहीं दिया। भगवान लक्ष्मी जी को बुलाने आए परंतु किसान ने उन्हें रोक लिया तब विष्णु भगवान बोले तुम परिवार सहित गंगा स्नान करने जाओ और इन कौड़ियों को भी गंगाजल में छोड़ देना तब तक मैं यहीं रहूंगा। किसान ने ऐसा ही किया गंगा जी में कौड़िया डालते ही चार चतुर्भुज निकले और कौड़िया लेकर चलने को उद्यत हुए ऐसा आश्चर्य देखकर किसान ने गंगा जी से पूछा यह चार हाथ किसके हैं।

गंगा जी ने किसान को बताया कि ये चारों हाथ मेरे ही थे तुमने जो मुझे कौड़िया भेंट की है , वे तुम्हें किसने दी है ? किसान बोला मेरे घर में एक स्त्री पुरुष आए हैं उन्होंने ही मुझे यह कौड़िया दी है ।तब गंगा जी बोलि वे लक्ष्मी जी और विष्णु भगवान है ।

तुम लक्ष्मी जी को मत जाने देना नहीं तो पुनः निर्धन हो जाओगे । किसान ने  घर लौटने पर विष्णु जी से कहा कि लक्ष्मी जी को नहीं जाने दूंगा । तब भगवान ने किसान को समझाया कि मेरे श्राप के कारण लक्ष्मी जी तुम्हारे यहां 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही हैं ।

फिर लक्ष्मी जी चंचल है, इन्हें बड़े-बड़े नहीं रोक सके तुम हट मत करो । यह सुनकर लक्ष्मी जी बोली है किसान ! यदि तुम मुझे रोकना चाहते हो तो कल धनतेरस है । तुम अपना घर स्वच्छ रखना रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना मैं तुम्हारे घर आऊंगी तुम उस वक्त मेरी पूजा करना किंतु मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी

यह कहकर लक्ष्मी जी दसों दिशाएं में व्याप्त हो गई और विष्णु जी देखते ही रह गए । किसान ने लक्ष्मी जी को की बात मान ली और लक्ष्मी जी द्वारा बताएं विधि से पूजा की इससे उसका घर धन-धान्य से भर गया । इस प्रकार किसान प्रतिवर्ष लक्ष्मी जी को पूजने लगा तथा अन्य लोग भी उनका पूजन करने लगे ।

श्री यमराज जी द्वारा धनतेरस का महत्व बताया गया है 

कथा यमराज ---  एक बार यमदूतो ने यमराज को बताया कि महाराज मनुष्यों की अकाल मृत्यु से हमारे मन भी पसीज जाते हैं यमराज ने द्रवित होकर कहा क्या किया जाए ? विधि के विधान की मर्यादा हेतु हमें ऐसा अप्रिय कार्य करना पड़ता है । तब यमदूत ने कहा महाराज इसका कोई उपाय तो होगा । तब यमराज ने अकाल मृत्यु से बचने का उपाय बताते हुए कहा कि धनतेरस के दिन पूजन एवं दीपदान को विधिपूर्वक अर्पण करने से अकाल मृत्यु से मुक्ति पाई जा सकती है । जहां-जहां जिस-जिस घर में यह पूजन होता है वहां अकाल मृत्यु का भय नही रहता है । इसी घटना से धनतेरस के दिन धन्वन्तरि पूजन सहित यमराज को दीपदान की प्रथा का प्रचलन हुआ ।

 
   

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां