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श्री हनुमान जयंती पर विशेष | अभय दाता श्री हनुमान | अष्टसिद्धि और नवनिधि क्या है ?

हनुमान जयंती पर विशेष { कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी }

अंजनीगर्भ  संभूतो वायुपुत्रो महाबलः ।
कुमारो ब्रम्हचारी च हनुमंताय नमो नमः ।।

अभय दाता श्री हनुमान


श्री हनुमान जी को अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता कहते है ।हनुमान चालीसा की चौपाई के अनुसार -:-
अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता ।
असबर दीन जानकी माता ।।
अष्टसिद्धि और नवनिधि क्या है ?
अष्ट सिद्धि 

अणिमा
साधक अदृश्य हो जाता है ।
महिमा
योगी अपने को बहुत बड़ा बना लेता है ।
गरिमा
भारी बनाना ।
लघिमा
हल्का बनाना ।
प्राप्ति
इच्छित पदार्थ की प्राप्ति ।
प्राकाम्य
इच्छा की प्रबलता ।
ईशित्व
सबपर शासन का सामर्थ ।
वशित्व
दूसरो को वश में किया जाता है ।


नौ निधि 

पद्म
महापद्म
शंख 
मकर 
कच्छप
मुकुंद
कुंद
नील
खर्व 


हमारे सनातन धर्म में अनेक उपास्य देवता है किंतु इन सभी उपास्य से, देवों में यदि किसी को ब्रह्मचर्य या मूर्तिमान स्वरूप कहा जा सकता है, तो वे है हमारे श्री हनुमान । स्वयं वानर होने पर भी दास्य भक्ति के प्रताप से भगवान श्री रामचंद्र के प्रिय दास होते हुए भी आप देवता बन गए । यह सिद्धि कोई दूसरा कपिपति नहीं प्राप्त कर सकता ।

   श्री हनुमान को साक्षात रुद्रावतार माना गया है । भगवान श्री शिव ने अपने परमाध्य श्री राम की अवतार लीला के दर्शन एवं उसमें सहायता प्रदान करने के लिए अपने अंश 11वे रुद्र से माता अंजना के गर्व से हनुमान रूप में अवतरित हुए ।
 गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्री हनुमान के स्तवन मैं उनके रुद्रावतार की ओर संकेत किया है ।

 " जयति मंगलागार संसार भायापहर वानरा कार विग्रह पुरारी । " 
{ विनय पत्रिका 27/1 }
श्रीराम प्रोक्त  कवच के प्रसंग में श्री सनत कुमार की श्री हनुमान जी के संबंध में प्रशस्ति है कि वे सब रूपों में अभिव्यक्त हैं, सर्वज्ञ हैं, सृष्टि करते तथा उसका पोषण करते हैं, एवं स्वयं ब्रह्मा, विष्णु व साक्षात महेश्वर हैं:-
स सर्वरूपः सर्वज्ञ सृष्टि स्थिति करो बतु ।
स्वयं ब्रह्मा स्वयं विष्णु साक्षात देवो महेश्वर।।

{ नारद पुराण पूर्व तृतीय पाद 78/ 24 से 25 }
परब्रम्ह रुद्रावतार श्री हनुमान का वृतांत वेद, पुराण, रामायण तंत्र मंत्र तथा अन्याय कृतियों में उपलब्ध होता है। श्री हनुमान साक्षात रूद्र रूप है ।

 " रुद्रावतार संजज्ञे वायुपुत्रः प्रतापवान "

 {आनंद रामायण सार 11/ 20}
श्री हनुमान एकादश रूद्र के मध्य 11 वे रुद्र हैं । वे शत्रुओं का संहार करने वाले हैं, वे परम कल्याण स्वरूप साक्षात शिव हैं  । तत्संबंध में गोस्वामी तुलसीदास जी ने स्पष्ट रूप से लिखा है:-
जेहि शरीर रतिराम सो सोई आदरहि सुजान ।
रूपदेहि तजि नेह  बस, वानर में हनुमान ।।
जानि राम सेवा सरस, समुज्ञि करव अनुमान ।
पुरुषा ते सेवक भए ,हर ते  में हनुमान !!

{दोहावली 142/40 }

वायु पुराण के पूर्वार्ध में भगवान महादेव के श्री हनुमान रूप में अवतार लेने का उल्लेख है ।

अंजनीगर्भ संभू तो हनुमान पवनात्मजः । 
यदा जातो  महादेवो  हनुमान सत्य विक्रम !!

 {60/ 73}

स्कंद पुराण में भी इसका प्रमाण मिलता है ।

यो वे  चैकादशो रुद्रो  हनुमान स महाकपि: ।
अवतीर्ण सहायतार्थ विष्णुरभित तेजसः ।।
 {माहेश्वर केदार 8/99-100}
उपर्युक्त कथन सर्वदा वेद सम्मत है । महर्षि वाल्मीकि आदि कवियों तथा मनीषियों ने भगवान विष्णु श्री राम के गुणगान से अपनी वाणी पवित्र की है ।
विभिन्न पुराणो, रामायण व अन्य कृतियों में श्री हनुमान के जन्म के विषय में अलग-अलग विचार तिथियां, वार नक्षत्र आदि का वर्णन विभिन्न रूपों में मिलता है ।

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, भौमवार, स्वाति नक्षत्र, मेष लग्न में माता अंजना के गर्व से स्वयं शिव जी ने कपीश्वर हनुमान के रूप में अवतार ग्रहण किया ।

 वायु पुराण के अनुसार


आश्विन स्थासिते पक्षे स्वात्या भौमे च मरुतिः ।
मेष लगने अंजना गर्भात स्वम जातौ हर  शिवः ।।

विश्व पंचांग एवं ऋषिकेश पंचांग के अनुसार श्री पवन कुमार का जन्म कार्तिक कृष्ण पक्ष नरक चतुर्दशी मंगलवार को सायं काल मेष लग्न में हुआ ।
एक मान्यता ऐसी है कि चैत्र मास शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि और मघा नक्षत्र में श्री हनुमान अवतरित हुए हैं।
भक्तों के लिए अपने आराध्य की सभी पुण्यतिथिया श्रेष्ठ हैं।

 श्री हनुमान जी के अनेक नाम बताए गए हैं परंतु इनमें 12 नाम:-

  1. हनुमान
  2. अंजनीसुनु
  3. वायुपुत्र
  4. महाबल
  5. रामेष्ट
  6. फाल्गुनसख (अर्जुन के मित्र )
  7. पिंगाक्ष  (भूरे नेत्र वाले)
  8. अमित विक्रम
  9. उदधिकमण (समुद्र का अतिक्रमण करने वाले)
  10. सीताशोक विनाशन 
  11. लक्ष्मण प्राणदाता एवं 
  12. दशग्रीव दर्पहा  (रावण के घमंड को दूर करने वाले मुख्य हैं ।)
श्री हनुमान जी भगवान श्री राम के सर्वोत्तम दास भक्त हैं ।श्री मारुति नंदन बाल ब्रह्मचारी, महावीर, अतिशय बलवान, अत्यंत बुद्धिमान, चतुर शिरोमणि, विद्वान, सेवा धर्म के आचार्य, सर्वथा निर्भय,  सत्यवादी, स्वामी भक्त, भगवान के तत्व, रहस्य गुण और प्रभाव को भली प्रकार जानने वाले, महा विरक्त, सिद्ध, परम प्रेमी भक्त और सदाचारी महात्मा है।
आप युद्ध विद्या में बड़े निपुण, इच्छा अनुसार रूप धारण करने में समर्थ तथा भगवान के नाम, गुण, स्वरूप और लीला के बड़े ही रसिक है। जहां भी श्री राम की कथा या कीर्तन होती है, वहां श्री हनुमान जी किसी ना किसी रूप में उपस्थित रहते हैं।
श्रद्धा ना होने के कारण उन्हें पहचान नहीं पाते। श्री हनुमान जी के गुण अपार हैं । वे सदैव ही भक्तों की रक्षा करते हैं। उनके स्मरण मात्र से ही, भूत, पिशाच एवं बड़े बड़े संकट दूर हो जाते हैं। उन्हें संकटमोचन कहा जाता है ।भगवान और उनके भक्तों के गुणों के विषय में जो कुछ लिखा जाए वह बहुत थोड़ा है । 
श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे सच्चे हृदय से निष्काम होके श्री हनुमान की आराधना पूजा-अर्चना विश्वास से करें अवश्य ही पवन पुत्र अपने भक्तों पर कृपा करेंगे वे बड़े दयालु और विनम्र हैं ।

श्री हनुमान जी को शत-शत नमन ।।
   

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