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बरुथिनी एकादशी व्रत कथा महत्व एवं पूजन विधि | Baruthini Ekadashi vrat katha


महत्व एवं पूजन विधि





वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी ही बरुथिनी एकादशी (Baruthini Ekadashi ) कही जाती है। इस दिन व्रत करके जुआ खेलना, निद्रालीन होना, पान खाना तथा परनिंदा क्षुद्रता, चोरी, हिंसा, रति, क्रोध तथा झूठ को त्यागने का महत्व है।





ऐसा करने से मानसिक शांति मिलती है। व्रती को हवीस्यांन का सेवन करना चाहिए। परिवार के सभी सदस्यों को रात्रि को भगवत भजन करके जागरण करना चाहिए, इससे स्वर्ग आदि उत्तम लोक प्राप्त होते हैं।





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बरुथिनी एकादशी का महत्व | Baruthini Ekadashi vrat





इस व्रत को करने से सुख तथा सौभाग्य में वृद्धि होती है. यह व्रत उत्तम फल देने वाला है. मान्यता है कि जो फल ब्राह्मणों को देने, तपस्या करने और कन्यादान करने से प्राप्त होता है, उससे कहीं अधिक फल बरुथिनी एकादशी करने से प्राप्त होता है.





इस व्रत को जो भी व्यक्ति करता है उसे परनिन्दा से बचना चाहिए, दातुन नहीं तोड़नी चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए और झूठ तो कतई नहीं बोलना चाहिए. इस व्रत में तेल से बना भोजन वर्जित होता है.





व्रत रखने पर शाम को केवल फलाहार ही करना चाहिए. इस व्रत (Ekadashi vrat) का माहात्म्य सुनने से हजार दोष भी खत्म हो जाते हैं.





एकादशी व्रत कथा | Baruthini Ekadashi vrat katha





प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मांधाता नामक एक राजा राज्य करता था। वह अत्यंत ही दान शील और तपस्वी था। एक दिन वह तपस्या करने में लीन था कि तभी एक जंगली भालू वहां आकर राजा मांधाता का पैर चबाने लगा ।





किंतु राजा पूर्ववत अपनी तपस्या में लीन रहा है। थोड़ी देर बाद भालू राजा को घसीट कर वन में ले गया। राजा घबराकर विष्णु भगवान से प्रार्थना करने लगा। भक्त की पुकार सुनकर विष्णु भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र से भालू को मारकर अपने भक्त की रक्षा की।





राजा के पैर का भक्षण भालू पहले ही कर चुका था ।इस कारण राजा बहुत दुखित हुआ। तब भगवान विष्णु ने राजा मांधाता से कहा, हे वत्स! तुम मथुरा जाओ और वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वाराह अवतार मूर्ति की पूजा करो।





उसके प्रभाव से तुम पुनः अपने पैरों को प्राप्त कर सकोगे । यह तुम्हारे पूर्वजन्म का फल है । राजा ने इस व्रत को अपार श्रद्धा एवं भक्ति से किया तथा पैरों को पुनः प्राप्त कर लिया ।





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1 टिप्पणियां

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    ~Justin

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