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मोहिनी एकादशी व्रत कथा एवं विधान | mohini ekadashi vrat katha

mohini ekadashi :- वैशाख शुक्ल एकादशी मोहिनी एकादशी (mohini ekadashi) के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन vrat करने से मोह और पाप नष्ट होते हैं। सीता जी की खोज करते समय भगवान श्रीराम ने इस व्रत को किया था ।  mohini ekadashi vrat katha बहुत पुन्य करी है

कौंडिल्य के कहने पर धृष्ट बुद्धि ने और श्री कृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर ने भी इस व्रत को किया था। आज भी सनातन धर्म के अनुयाई बड़ी श्रद्धा से इस व्रत को करते हैं। आइये जानते है (mohini ekadashi) की पौराणिक vrat katha   :-
mohini ekadashi vrat katha
mohini ekadashi

मोहिनी एकादशी व्रत कथा एवं विधान | mohini ekadashi vrat katha

एक राजा के कई पुत्र थे। उसमें से एक राजकुमार धृष्ट बुद्धि बड़ा ही व्यभिचारी, दुर्जनों का संगी, बड़ों का अपमान करने वाला था। राजा ने उससे तंग आकर एक दिन उसे अपने राज्य से बाहर निकाल दिया । वह वनों में जाकर रहने लगा और जानवरों को मारकर अपनी भूख मिटाने लगा। 1 दिन पूर्व जन्म के संस्कारवश एक ऋषि के आश्रम पहुंचा। ऋषि ने उसे सत्संगति का महत्व समझाया ।

यह भी देखे :- नरसिंह जयंती व्रत विधान एवं व्रत कथा | Narsingh jayanti vrat katha

इससे उस राजकुमार का हृदय परिवर्तित हो गया। वह अपने किए पाप कर्मो पर पछतावा करने लगा। तब ऋषि ने उसे वैशाख शुक्ल एकादशी का व्रत (mohini ekadashi vrat) करने की सलाह दी। व्रत के प्रभाव से उस दुष्ट राजकुमार की बुद्धि निर्मल हो गई। आज भी यह व्रत बड़ी श्रद्धा के साथ किया जाता है।


SANATANA DHARMA VISHES





















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1 टिप्पणियां

  1. I don't typically comment on posts, but as a long
    time reader I thought I'd drop in and wish you all
    the best during these troubling times.

    From all of us at Royal CBD, I hope you stay well with the
    COVID19 pandemic progressing at an alarming rate.


    Justin Hamilton
    Royal CBD

    जवाब देंहटाएं