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Narasimha Jayanti 2021 | नृसिंह जयंती पूजन विधि तथा व्रत कथा

Narasimha Jayanti 2021 :- वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के दिन भक्त पहलाद की मान मर्यादा की रक्षा हेतु भगवान नरसिंह (Narsingh bhagwan) प्रकट हुए थे । इसलिए यह तिथि एक पर्व के रूप में मनाई जाती है । इस व्रत को प्रत्येक नर-नारी कर सकते हैं ।  आइये जानते है Narasimha Jayanti 2021 सम्पूर्ण जानकारी

 Narasimha Jayanti vrat vidhi | नृसिंह जयंती पूजन विधि

व्रती को दोपहर के समय में वैदिक मंत्रो का उच्चारण करते हुए स्नान करना चाहिए । नरसिंह भगवान की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराकर और मंडप में स्थापित करके, विधिपूर्वक पूजन करने का विधान है।
ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान दक्षिणा वस्त्र आदि देना अभीष्ट है। सूर्यास्त के समय मंदिर में जाकर आरती करके ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। इस विधि से व्रत करके उसका पारण करने वाला व्यक्ति अलौकिक पीड़ा से मुक्ति पा जाता है। अब जानते है Narasimha Jayanti vrat katha :-
Narsingh jayanti vrat katha


Narasimha Jayanti 2021 | नृसिंह जयंती पूजन विधि तथा व्रत कथा

राजा कश्यप के हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु नाम के दो पुत्र थे। राजा के मरने के बाद पुत्र हिरण्याक्ष राजा बना। किंतु हिरण्याक्ष बड़ा क्रूर राजा निकला । वाराह भगवान ने उसे मौत के घाट उतार दिया इसी का बदला लेने के लिए उसके भाई हिरण्यकशिपु ने भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया। तप सिद्ध होने पर उसने भगवान शिव से वर मांगा -

कि मैं न अंदर मारु, ना बाहर, ना दिन में, ना रात में, ना भूमि पर मरू, न आकाश में, न जल में मरु,न मनुष्य के हाथ मरु, ना पशु के हाथ मरु । भगवान शिव तथास्तु कहकर अंतर्धान हो गए । 

यह वरदान पाकर वह अपने को अजर और अमर समझने लगा । उसने अपने को ही भगवान घोषित कर दिया । उसके अत्याचार इतने बढ़ गए कि चारों और त्राहिमाम, त्राहिमाम मच गया । इसी समय उसके यहां एक बालक का जन्म हुआ । जिसका नाम प्रहलाद रखा गया । प्रहलाद के बड़ा होने पर एक ऐसी घटना घटी की प्रहलाद ने अपने पिता को भगवान मानने से इनकार कर दिया । घटना यह थी कि कुम्हार के आवे में एक बिल्ली ने बच्चों को जन्म दिया | अकस्मात आवे में आग लग गई । किंतु आवे में आग लगने पर भी बिल्ली के बच्चे जीवित निकल आए । इससे प्रहलाद के मन में भगवान के प्रति निष्ठा बढ़ गई । भगवान की भक्ति के आगे वह अपने पिता के अत्याचारों का विरोध करने लगा ।

यह भी देखे :- महाशिव रात्रि व्रत विधान | महाशिवरात्रि व्रत कथा | maha shivaratri vrat katha

Narasimha Jayanti 2021 | नृसिंह जयंती पूजन विधि तथा व्रत कथा

हिरण्यकशिपु ने अपने बेटे को बहुत समझाया कि मैं ही भगवान हूं, किंतु वह इस बात को मानने को तैयार नहीं हआ । हिरण्यकशिपु ने उसे मारने के लिए एक खंभे से बांध दिया और तलवार से उस पर तीव्र प्रहार किया । उसी समय खंभा फाडकर भयंकर शब्द करते हुए भगवान नृसिंह प्रकट हुए ।

भगवान का आधा शरीर पुरुष का तथा आधा शरीर सिंह का था उन्होंने हिरण्यकशिपु को उठाकर अपने घुटनों पर रखा और दहलीज पर ले जाकर गोधूलि बेला में अपने नाखूनों से उसका पेट फाड़ डाला । इसके बाद प्रहलाद के निवेदन पर ही भगवान नृसिंह ने उसे मोक्ष प्रदान किया तथा प्रहलाद की सेवा से प्रसन्न होकर वरदान दिया कि आज के दिन जो लोग मेरा व्रत करेंगे, वे पापमुक्त होकर मेरे परमधाम को प्राप्त होंगे ।



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3 टिप्पणियां

  1. For Christ's sake! I had no idea this would be so challenging :-/
    https://intensedebate.com/people/pastasphynx

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  2. I just give up, would you lend me a hand here?((
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