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सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी तेरा कोई पार न पाया | श्री जगदंबा जी की आरती

सनातन धर्म में पूजन के बाद आरती का महत्व बताया गया है माँ जगदम्बा के कई स्वरुप है , माँ जगदम्बा को कई  नामो से जाना जाता है जैसे - गौरी, पद्मा, सची, मेधा, सावित्री ,विजया, जया आदि  नामो से माता की pujan, अर्चना  की जाती है माता के हर स्वरुप की ( pujan) पूजन  विधि भी अलग है और उसी प्रकार से माता के हर स्वारूप की आरती Aarti भी अलग है आज हम जिस स्वरुप की आरती कर रहे है  वह है जगदम्बा स्वरुप जो जगत का कल्याण करने वाली है आइये माता की आरती करते है :- 

sun meri devi parwat wasini devi ji ki aarti

सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी  तेरा कोई पार न पाया

श्री जगदंबा जी की आरती

सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी, कोई तेरा पार न पाया।

पान सुपारी ध्वजा नारियल ले, तेरी भेंट चढ़ाया ।।

सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी .....................

सारी चोली तेरे अंग बिराजे, केसर तिलक लगाया ।

ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे, शंकर ध्यान लगाया।।

सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी .....................

नंगे पग से तेरे, सम्मुख अकबर आया ।

सोने का छत्र चढ़ाया ।।

सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी .....................

ऊंचे ऊंचे पर्वत बन्यौ शिवालो, नीचे महल बनाया ।

धूप, दीप नैवेद्य आरती, मोहन भोग लगाया ।।

सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी .....................

ध्यानु भगत मैया तोरे गुण गावे, 

मन वांछित फल पाया ।।

सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी .....................




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